इंसान की समझ कहानी - Hindi Kahani

 इंसान की समझ

Hindi Kahani - इंसान की समझ
हिंदी कहानी 
यह छोटी सी कहानी एक स्कूल टीचर की है | एक गाँव में एक टीचर रहा करता था उसके परिवार में एक बेटा-बेटी और उसकी पत्नी रहती थी बेटा और बेटी दोनों ही जवान हो चुके थे बेटे की पढ़ाई पूरी होने वाली थी घर में सबकुछ बहुत बढ़िया चल रहा था |

एक दिन मास्टर जी के मन में खयाल आया की मेरे घर में जो कुछ भी है वो मेरी वजह से है मास्टर जी में अहंकार आ गया था और इस ख्याल ने मास्टर जी की सोच बदल दी | मास्टर जी सोचने लगे की मैं हु तो मेरे परिवार वाले जी पा रहे है मैं नहीं तो मेरा परिवार नहीं | यह ख्याल दिन व  दिन बढ़ता गया और कब मास्टर जी में घमंड आ गया पता ही नहीं चला |

एक दिन युही खाली बैठे थे तो इन्होंने फिर इस बात पर सोचा और इस निष्कर्ष पर पहुंचे की इन्हे घमंड आ गया है टाइम के साथ साथ इनका घमंड और भी बढ़ गया था स्कूल में भी दूसरे टीचर और स्टूडेंट्स मास्टर जी से परेशान रहने लगे |  और यह बात सोच कर मास्टर जी और दुखी हो गए |

एक दिन गांव में एक बाबा संत साधु आयें और उन्होंने एक प्रवचन दिया की इंसान को कभी घमंड नहीं करना चाहिए | कभी भी यह नहीं सोचना चाहिए की मेरी वजह से मेरे घर वाले खुश है मेरी वजह से मेरी कंपनी, दुनिया, घर, संसार चल रहा है | 

क्योंकि घमंड तो लका पति महान राजा रावण का भी नहीं चला तो हम क्या चीज है |

तभी मास्टर जी ने यह सोचा की इन बाबा साधु संत से में मेरी समस्या को सुलझा सकता हुं |  टीचर उन साधु बाबा के पास गए और सारी बात विस्तार में बताई और बोला की बाबा जी मुझे ऐसा लग रहा है की मेरी वजह से मेरा परिवार चल रहा है अगर मैं नहीं रहूँगा तो मेरे घर वाले बर्बाद हो जायेंगे और वो कभी खुश नहीं रह पायेंगे
मास्टर जी ने बोला की मैं यह जानना चाहता हुं की वाकई में मेरी वजह से मेरे घर वाले खुश है या यह सिर्फ मेरी सोच है |

तो बाबा जी ने बड़ा ही सरल उपाय बताया बाबा जी बोले अगर तुम्हारे वाकई यह जानना है तो तुम्हें एक काम करना होगा |

मास्टर जी बोले बोलिये महाराज जी अगर मेरे से होगा तो में ज़रूर करूँगा |
तो बाबा जी बोले तुम्हें 2 साल के लिए शहर में जाकर के रहना है लेकिन अपने परिवार को बिना बताये | मास्टर बोला ठीक है तो मास्टर जी उसी टाइम से किसी को बिना बताये शहर चले गए और वहा जाकर रहने लगे |
और पीछे गांव में साधु बाबा ने यह अफ़वाह फैला दी की उनके एक भक्त को उनके आश्रम में से शेर उठा के ले गया |  और वो व्यक्ति और कोई नहीं मास्टर जी है |

फिर क्या यह बात मास्टर जी के घर वालो तक पहुंची घर वाले दुखी हो गए घर में दुःख का माहौल हो गया | लेकिन गांव वालो ने मास्टर जी के परिवार को सहमति दी और बोले की गबराये नहीं हम सारे गांव वाले आपके साथ है हम सब मिलके सब कुछ ठीक कर देंगे |

फिर क्या मास्टर जी की एक ही बेटी थी और वो जवान हो गयी तो गांव वालो ने चंदा इकट्ठा कर के लड़की की शादी कर दी | मास्टर जी का बेटा भी जवान हो गया था और उसकी पढ़ाई भी पूरी हो गयी थी तो एक जमींदार ने उसे काम पे रख लिया | बेटे की नौकरी लग गयी और बेटे की भी शादी हो गयी घर में बहु आ गयी तो माँ को भी आराम मिल गया घर में सब कुछ पहले जैसा हो गया था |

सभी घर वाले मिलजुल कर साथ में सुख से रहने लगे थे |  दो साल भी पुरे हो गए तभी शहर से मास्टर लौट के गांव वापस आया तो देखा की घर में तो सभी खुश थे सब कुछ वैसा का वैसा था जैसा की पहले था

मास्टर जी को समझ आ गया था की इस दुनिया में कोई भी इंसान किसी के ऊपर निर्भर नहीं है हर व्यक्ति अपनी मेहनत से अपनी जिंदगी चला रहा है |

मास्टर जी घर में गए सब को सब कुछ सच सच बताया और अपनी सारी बात समझाई और बोले की यह उपाय मुझे बाबा जी ने ही दिया था |मास्टर जी ने घर वालो से माफ़ी मांगी और बोले की मुझे माफ़ कर दो मुझे नहीं पता था की कोई इंसान किसी दूसरे इंसान पर निर्भर नहीं है |

यह छोटी सी कहानी हमें बहुत बड़ी बात सिखाती है की इंसान को कभी भी अपने ऊपर घमंड नहीं करना चाहिए | अगर हम यह सोच रहे है की हमारी वजह से कुछ चल रहा है तो हम गलत सोच रहे है

दुनिया में महान से महान व्यक्ति आयें और चले गए लेकिन यह दुनिया चलती रही और ऐसे ही चलती रहेगी |

एक छोटी सी बात कहना चाहूँगा की इंसान को अपने कर्मो को ना देखते हुए हमेशा ऐसे काम करते रहना चाहिए ताकी दूसरों का भला हो और लोग हमें दुवाये दे |

आज की यह छोटी सी कहानी "इंसान की समज"
आशा करता हुं की आपको यह कहानी बहुत ही अच्छी लगी होगी | अगर आपको इस कहानी से ज़रा सी भी सिख मिलती है तो इस कहानी को ज़रूर शेयर करे 

मैं मिलता हुं आपसे अगली कहानी में तब तक के लिए खुश रहे आबाद रहे | 

इंसान की समझ सिर्फ इतनी है की उसे जानवर कहे तो नाराज़ हो जाता है और शेर कहो तो खुश हो जाता है वो यह नहीं सोचता की शेर भी तो एक जानवर है | 

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