चिन्ता को कैसे दूर करे और सुखी जीवन कैसे जिए

         चिन्ता को कैसे दूर करे और सुखी जीवन कैसे जिए


एक कहावत है की चिता हमारे शव को जलाती है लेकिन चिंता एक जीते जागते इन्सान को जला डालती है और एक ऐसा व्यक्ति जो की हमेशा चिंता करता रहता है वो कभी भी सुखी नहीं रह सकता है तो आज हम बात करेंगे की कैसे अपनी चिंता को दूर किया जाये और एक सुख और शांति भरा जीवन कैसे जिया जाता है | 

हम सभी जानते है की जैसे ही बचपन निकलता है वैसे ही इंसान को कई चिंताए घेर लेती है जैसे बच्चो को स्कूल कॉलेज एग्जाम और उसके बाद रिजल्ट आने की चिंता और बाकी को कभी शादी, तो कभी करियर, सरकारी नौकरी की चिंता माँ बाप को पैसो और उनके बच्चो की चिंता और पुरे जीवन न जाने कितनी चिंताओं से गिरा रहता है | 


चिंतन करो चिंता नहीं 

अगर कभी भी ऐसी परिस्थिंति में फस जाओ जिसमे की दिमाग बार बार उसी जगह जा रहा है और उसी चीज को बार बार सोच रहे हो तो यह है चिंता ऐसे में आँख बंद करो और एक बार पुरे ध्यान से सोचो की चल क्या रहा है और किसी भी एक निर्णय पर आ जाओ और उसको सही साबित करने में लग जाओ और इस चीज को कहते है चिंतन इसलिए जब भी कोई चिंता सताए तो चिंतन करो चिंता नहीं | 


कभी भी निराश और हताश ना हो 

हमें किसी व्यक्ति के निराश और हताश होने से ही पता चलता है की उसको किसी बात की चिंता है क्योकि निराशा उसके चेहरे से झलक रही होती है और चिंता का पहला लक्सन है निराशा और यह एक ऐसी चीज है जिससे की हमें अपने आप पर और अपने समताओं पर संदेह होने लग जाता है और समय गवाह है की इंसान जब जब नाराज हुआ है तब तब उसे हार का सामना करना पड़ा है | 
अगर हमें तैरना है तो हमें पानी में उतरना ही पड़ेगा एक बार डूबेंगे लेकिन उसके बाद डर ख़तम हो जायेगा उसी प्रकार जब भी किसी भी कारण से चिंता सताए तो सबसे पहले उसे कुछ समय के लिए अपने दिमाग से हटा दो और उसके बाद आराम से चिंता को चिंतन में बदल दो | 


बात का बतंगड़

दुनिया का यह दस्तूर है की किसी भी बात को बढ़ा चढ़ा कर कहना अगर हम एक बात किसी और को कहते है तो जब वोही बात घूम फिर कर हमारे पास आती है तो उसमे दो चार बात ज्यादा ही होती है और एक छोटी सी बात लेकर झगड़े हो जाते है हमें जिस चीज के लिए झगड़ना चाहिए उसके लिए तो हम कभी सोचेगे भी नहीं क्योँकि हमें अपने से नहीं दुसरो की बातो से मतलब है
 
सबसे पहले हमें खुद को बदलना चाहिए और उसके बाद हमें किसी और को ज्ञान देना चाहिए 

हमने कभी न कभी तो कही न कही पढ़ा होगा या किसी से सुना होगा जो होता है अच्छा होता है और अगर आप इस बात पर विशवास करते हो तो फिर किस बात की चिंता क्योकि इस संसार में कोई भी व्यक्ति चिंता करके किसी भी समस्या का समाधान नहीं निकाल पाया है और ना कभी निकाल पायेगा | 

इसलिए जो मिलता है उसे स्वीकार करना सीखो और एक बात याद रखना जो जीवन देता है वो जीने का सहारा और व्यवस्था भी करता है इसलिए अगर चिंता है तो उसका समाधान भी है और हमेशा इस भाव से जियो की रात गयी और बात गयी और फिर यह तय है की आपको तनाव कभी नहीं आएगा | 

हमेसा वर्तमान में जीने की कोसिस करे ना की ना पिछली बातो को सोच सोच कर खुद को दुखी करे और ना ही आगे क्या होगा कैसे होगा उसको सोच सोच कर अपने आप को नोच कर खा जाये | 

एक बात और अगर फिर भी चिंता हो रही है तो उससे जूझने का प्रयास करे बाद में जो होगा वो देखा जायेगा क्यों फ़ालतू में किसी मुसीबत को मोल लेना नहीं तो सोचते ही रह जाओगे और हां हमेशा थोड़ा सा समय अपने लिए निकाले किताबे पढ़े, और हमेशा सीखते रहे हर समय मुँह लटकाये ना रहे | 

एक बात हमेसा याद रखना मस्त रहो और वो भी मस्ती

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