अपने पुरे जीवन में इन दो कहानियो को जरूर सुने | Inspirational Story in Hindi

               अपने पुरे जीवन में इन दो कहानियो को जरूर सुने | Inspirational Story in Hindi

सम्राट की कहानी

एक सम्राट किसी फ़क़ीर के पास बैठा हुआ अपनी सत्ता , सम्पत्ति , वैभव और राज्य की यशोगाथाएँ सुना रहा था । यह कह रहा था फ़कीर साहब जितना सुंदर राजमहल मेरा है , उतना सुंदर राजमहल दुनिया में शायद ही दूसरा हो । राजमहल की दीवारों में सामान्य रंग नहीं है । उन पर सोने के बरक़ लगाए गए हैं ।

सम्पूर्ण भरतखंड में मेरे विशाल साम्राज्य के समान दूसरा न होगा । फकीर साहब जितनी सुंदर राजरानियाँ मेरे महल में है , अन्य कहीं देखने को भी नहीं मिलेंगी । जितना विशाल राजकोष मेरे पास है , किसी अन्य सम्राट के पास नहीं होगा । 

जैसा कि होता है प्रत्येक सम्पन्न व्यक्ति अपनी सम्पन्नता और वैभव को गाथाएँ कहते पाए जाते हैं वैसे ही वह सम्राट भी फ़कीर के सामने अपने ऐश्वर्य का बखान कर रहा था । सत्ता से बड़ी एक सत्ता सम्राट बोलता रहा , फ़क़ीर शांत भाव से सब कुछ सुन रहा था । अन्ततः सम्राट चुप हो गया । 

अब बोलने की बारी फ़कीर की थी । फकीर ने कहा सम्राट , तुम मेरे एक प्रश्न का जवाब दो । सोचो कि तुम अपने सैनिकों के साथ खेलने जंगल में गए । वहा तुम मार्ग भटक गए और अपने सैनिकों से बिछुड़ कर जंगल में बिलकुल अकेले पड़ गए।

गर्मी तेज थी वहाँ तुम्हें जोर की प्यास लगी । आसपास खूब तलाश करने के बाद भी तुम्हें कहीं पानी न मिला । न तालाब दिखा , न कुआँ और तो और कहीं नाला भी न मिला । भयंकर गर्मी में तुम प्यास से तड़पने लगे । तुम्हें लगा कि अब आधा एक घंटा और पानी नहीं मिला तो प्यास के मारे तुम्हारे प्राण ही निकल जाएंगे । 

तुम्हारा मन प्यास से आकुल - व्याकुल हो रहा है । तभी एक युवक वहाँ पहुंचता है और तुमसे कहता है कि उसके पास एक लोटा ठंडा मीठा पानी है क्या तुम पीना चाहोगे ? तुम यकायक पानी देखकर एकदम प्रसन्न होकर
पानी पीना चाहोगे लेकिन युवक तुमसे इस पानी की कीमत मांगेगा । तब तुम क्या करोगे ? 

सम्राट ने कहा एक स्वर्ण मुद्रा दे दूंगा । फ़कीर ने कहा , अगर तब भी वह पानी न दे तो ? सम्राट ने कहा , स्वर्ण मुद्रा दे दूंगा । फ़कीर ने कहा अगर तब भी वह पानी न दे तो ? सम्राट ने कहा ,मरता क्या न करता , मैं अपना अंतिम दाँव खेलूंगा , क्योंकि प्यास तो जरूर बुझाऊंगा , उसे आधा साम्राज्य दे दूंगा और एक लोटा पानी ले लूंगा । 

फ़कीर ने कहा तुम्हारा आधा साम्राज्य भी अगर एक लोटा पानी न दिला सके और वह युवक फिर भी इनकार कर दे तो ? सम्राट ने कहा , तब मैं उसी से पूछ लूंगा कि वह क्या कीमत चाहता है । फ़क़ीर ने कहा , वह कहे कि मुझे तुम्हारा पूरा साम्राज्य चाहिए तब तुम्हें एक लोटा पानी मिल सकता है । 

एक ओर तुम्हारा जीवन दूसरी ओर पूरा राज्य , बोलो सम्राट सोचकर निर्णय दो कि तब तुम क्या करोगे ? कुछ क्षणों तक सम्राट मौन रहा । फ़कीर ने पूछा , क्या तुम मना कर दोगे ? सम्राट ने कहा , नहीं । सत्ता और साम्राज्य से भी बड़ी आदमी की जिंदगी होती है और जिंदगी बचाने के लिए सत्ता और साम्राज्य की कुर्बानी दी जा सकती है ।

फ़कीर साहब , तब मैं अपनी जिंदगी और प्राणों को बचाने के लिए अपना सारा साम्राज्य उस युवक के नाम करने को तैयार हो जाऊंगा । फ़कीर मुस्कुराये और बोले तो यही है तुम्हारे इस तथाकथित अकूत वैभव और ऐश्वर्य का मोल । पता है तुम्हारे इस सम्पूर्ण राज्य का मोल कितना है ?

एक लोटे पानी जितना है मै तुम्हे यही बोध करवाना चाहता था की तुमने जो इतना यशोगान कर रहे हो इसकी कीमत केवल एक लोटा पानी जितनी है | 


सिकंदर की कहानी 

सभी को याद है की सिकंदर ने पुरे भारत पर ही नहीं बल्कि पुरे विश्व पर राज किया था लेकिन सिकंदर अपनी आयु के पैंतीस वर्ष भी पूर्ण नहीं कर पाया था कि बीमार हो गया । रोग भी ऐसा लगा कि चिकित्सकों ने कह दिया कि उसे रोगमुक्त कर पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकीन है । 

उसकी आयु के एक - दो घंटे ही शेष रहे थे कि चिकित्सकों ने कह दिया कि अब उसे जो कुछ करना है कर ले । सिकंदर अपनी मां को बहुत प्यार करता था । वह चाहता था कि उसकी माँ जो उससे बहुत दूर यूनान में थी उसका मुंह देख ले और उसकी गोद में सिर रखकर अपने प्राण छोड़े , लेकिन यह असंभव था । चिकित्सक कुछ नहीं कर पा रहे थे । 

तब सिकंदर ने वही किया , जो हर सम्पन्न व्यक्ति करता है , उसने अपना दाँव खेला और कहा , अगर तुम लोग मुझे चौबीस घंटे की जिंदगी दे सके तो मैं प्रत्येक डॉक्टर को एक करोड़ स्वर्ण मुद्राएँ दूंगा । डॉक्टरों ने कहा , कैसी मज़ाक करते हो सिकंदर । क्या धन से , सोने से जिंदगी खरीदी जाती है ? तब हताश हुए सिकंदर ने अपनी जिंदगी का दूसरा दाँव खेला । 

उसने कहा तुम मुझे केवल बारह घंटे की ज़िंदगी दे दो मैं तुम्हें अपने विश्व साम्राज्य का आधा हिस्सा दे दूंगा डॉक्टरों ने कहा हम कोशिश कर सकते हैं , लेकिन बचाना हमारे हाथ में नहीं है । और हताश होकर सिकंदर ने जीवन का अंतिम दांव लगाया कि अगर कोई मुझे दस घंटे की जिंदगी दे दे तो दुनिया का सारा साम्राज्य उसके नाम कर दूंगा। 

लेकिन कोई ऐसा न कर सका । सिकंदर देखता रहा कि उसकी सांस धीमी पड़ने लगी , उसके प्राण निकलने को हो गए , तब उन क्षणों में मरने से पहले , अपने पास खड़े लोगों से कहा , मेरे मरने के बाद लोगों को बताना कि सिकंदर जिसने सारी दुनिया को जीता, पर अपनी जिदंगी से हार गया ।

इसलिए अपने पैसो का नहीं अपने जीवन का मूल्यांकन करना सीखो जिसने अपने जीवन का मूल्य समझ लिया वह हमेशा दुनिया की सम्पति से अपने जीवन को ऊपर रखेगा और अपने जीवन का सही उपयोग करेगा |

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