किस व्यक्ति को अपना मित्र बनाये और किसे नहीं



किस व्यक्ति को अपना मित्र बनाये और किसे नहीं

किसी इंसान को उसके जीवन में तीन चीजे बड़े नसीब से मिलती है एक अच्छी पत्नी, अच्छी सन्तान और अच्छा मित्र और वास्तव में देखा जाये तो पत्नी और सन्तान से भी ज्यादा महत्व किसी व्यक्ति के जीवन में एक दोस्त अदा करता है पत्नी को चुनने में हमारा पूरा हाथ नहीं होता है और ना ही सन्तान को पैदा करने में क्योकि एक में हमारे घरवाले हमारे साथ होते है तो दूसरी चीज प्रकति की देन होती है | 

लेकिन एक मित्र के चयन में सिर्फ और सिर्फ हम जिम्मेदार होते है और हमारे मित्र वैसे ही होते है जैसे हमारा व्यक्तित्व और हमारी सोच होती है 

एक बात याद रखना की कभी भी किसी व्यक्ति से थोड़ी सी बात करने पर मित्रत्रा नहीं होती है ऐसा नहीं होना चाहिए की कही घूमने गए या फिर मूवी देखने गए और किसी से मुलाकात हुई और इस तरह से मित्रत्रा बढ़नी शुरू हो गयी न जाँच पड़ताल की के सामने वाला व्यक्ति कैसा है और न वो समझ पाया की हमारा आचरण कैसा है यह बात सही है की हमारा व्यव्हार हमेशा एक मित्र के जैसे ही होनी चाहिए लेकिन एक निजी मित्रत्रा बहुत ही सजगता और सावधानी से होनी चाहिए क्योकि हमारा मित्र हमारा प्रतिरूप होता है 

और हम अपने जीवन में सबसे ज्यादा अपने मित्र से ही प्रभावित होते है हम एक बार को अपने माँ बाप की बात भी टाल सकते है लेकिन हम चाह कर भी कभी अपने मित्र की बात कभी नहीं टाल सकते है इसलिए याद रहे की भूल कर भी हमे एक ऐसे व्यक्ति को अपना दोस्त बना ले जो की गलत आदतों का शिकार हो | 

अगर आपको लगता है की आपका सबसे परम मित्र भी किसी गलत आदतों में पड़ चूका है तो उन गलत बातो को नजरअंदाज न करे सबसे पहले तो अपने मित्र को समझाने की कोसिस करे और उसे सही रास्ते पर लाने की कोसिस करे तब भी अगर आपको लगता है की आपका दोस्त आपके बातो को सही नहीं समझता है तो यह ही समझदारी होगी की आप अपने सबसे अच्छे मित्र को भी त्याग दे | 

और याद रखना की एक सच्चा मित्र वो नहीं है जो की आपकी हाँ में हाँ मिलाये बल्कि एक सच्चा मित्र वो होता है जो की सही को सही बोले और गलत को गलत | 

इसके अलावा यह याद रखे की हमेसा अपने दोस्त को घर से बाहर रखे उतना ज्यादा अच्छा मै यह नहीं कहता की आप अपने मित्र को घर के बाहर रखे लेकिन एक सिमा तक दोस्तों की भीड़ इकट्ठी ना हो क्योकि कुछ लोगो की आदत होती है की वो ज्यादा से ज्यादा लोगो को परिचित बनाने की कोसिस करता है 

अगर आपके बहुत से मित्र है तो यह याद रखे की आपका कोई भी मित्र नहीं है क्योकि जब भी आप किसी मुसीबत में आओगे तो एक मित्र यह सोचेगा की मै नहीं तो वो उसकी मदद कर देगा और दूसरा तीसरे पर और कोई आपकी मदद करने नहीं आएगा | 

इसलिए अगर भला मित्र हो तो एक ही अच्छा हो अगर आपके कोई भी मित्र नहीं है तो गबराये नहीं गलत आदतों को मित्र बनाने से अच्छा आप बिना मित्र के रहे और एक बात और की कभी भी मुर्ख व्यक्ति को अपना दोस्त न बनाये क्योकि एक मूर्ख मित्र उतना ही नुकसानदेह होता है जीतना की एक जहर इसलिए एक मुर्ख मित्र से ज्यादा अच्छा होता है की आप एक बुद्धिमान दुश्मन को पाल लो | 

इसके अलावा मित्र कभी स्वार्थी और चालाक नहीं होने चाहिए और अगर बच सको तो हमेसा उन लोगो से बचो जो की दुसरो की चापलूसी करे सामने तो आपकी तारीफ करे और पीठ पीछे आपकी बुराई और हमेशा एक ऐसे व्यक्ति को अपना मित्र बनाये जो की हमसे बेहतर हो क्योकि इससे आपको बिना काम किये अपनेआपको बेहतर बना सकते है | 

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