कहानी - वास्तव में संत शब्द का क्या मतलब होता है

sant ki kahani hindi


एक बार की बात है एक फ्रांसिस संत अपने शिष्य लियो के साथ एक नगर से दूसरे नगर की ओर जा रहे थे । वे जंगल से गुजर रहे थे और भंयकर बारिश हो रही थी । शिष्य पीछे और गुरु आगे चल रहे थे । मिट्टी गीली हो गई थी और दोनों के पाँव फिसल रहे थे । कपड़े मिट्टी से गंदे हो गए , पाँवों में कीचड़ लग गया , और तो और ; हाथ की अंगुलियाँ और हथेली भी मिट्टी से सन गई । बारिश में भीगते हुए शिष्य लियो ने अपने गुरु संत फ्रांसिस से पूछा गुरुवर , यह बताएं कि दुनिया में संत कौन होता है ?

फ्रांसिस ने कहा वह संत नहीं है जो पशु - पक्षियों की आवाज समझ लेता है । दो मिनट बाद लियो ने फिर पूछा संत कौन होता है ? लियो , वह व्यक्ति भी संत नहीं होता जो कपड़े बदलकर साधु हो जाए । शिष्य ने फिर पूछा प्रभु , तो फिर संत कौन होता है ? संत ने कहा लियो संत वह भी नहीं होता जो अंधों को आँखें और बहरों को आवाज
दे दें । 

शिष्य चकराया कि अगर वह भी संत नहीं है तो फिर संत कौन है ? उसने अपना प्रश्र पुन : दोहराया । फ्रांसिस
ने कहा संत वह भी नहीं है जो गरीब को अमीर बना दे । लियो चकराया कि मेरा प्रश्न तो यह है कि संत कौन होता है
और मेरा गुरु बार - बार यह बता रहे हैं कि संत कौन नहीं होता । 

वह झुंझला गया और कहा गुरुवर , आप साफ - साफ बता दें कि आखिर संत कौन होता है ? गुरु ने कहा , सुनो , हम लोग जब तक नगर में पहुंचेंगे , मध्य रात्रि हो जाएगी । बारिश हो रही है हाथ - पांव - कपड़े सब गीले होकर मिट्टी से सन गए हैं ऐसे में रात्रि के एक - डेढ़ बजे तक नगर में पहुँच पाएँगे । 

वहाँ पहुँचकर किसी धर्मशाला के द्वार पर जाकर उसे खटखटाएंगे। तब भीतर से चौकीदार पूछेगा बाहर कौन है ?  हम कहेंगे दो संत हैं । सराय में रहना चाहते हैं । तब वह गुस्से में कहेगा भगो - भगो , पता नहीं कहाँ से संत आ जाते हैं ? पैसा तो देंगे नहीं , रात की नींद खराब करेंगे , चलो भगो ।

तब पन्द्रह मिनट बाद हम लोग फिर से दरवाजा खटखटाएँगे कहेंगे , भैया दरवाजा खोलो । भीतर सोया हुआ
चौकीदार पूछेगा बाहर कौन ? तब हम फिर कहेंगे वही दो संत । चौकीदार कहेगा अरे , क्या तुम अभी तक बैठे हो
? भगो यहाँ से , नहीं तो डंडा मार कर भगाऊंगा । मैं तुम लोगों के लिए दरवाजा नहीं खोलूँगा । 

मुफ्तखोरों ! एक कौड़ी देकर नहीं जाओगे । रात की नींद बिगाड़ रहे हो , भगो यहाँ से । लियो , पन्द्रह मिनिट बाद हम फिर दरवाजा खटखटाएँगे । फिर वह पूछेगा , बाहर कौन ? तब भी अपना जवाब होगा , वे ही दो संत । और तब वह चौकीदार हाथ में डंडा लेकर बाहर आएगा और दरवाजा खोलते ही हम लोगों की पीठ पर आठ - दस डंडे मारेगा । 

लियो , जब वह हमें डंडे मार रहा हो तब भी हमारे हृदय में अगर उसके लिए प्रेम उमड़ता रहे तो समझना हम सच्चे संत हैं । इस तरह का व्यवहार किए जाने के बाद भी हमारे हृदय में प्रेम और भाईचारे की भावना पलती रही तो मान लेना कि हम सच्चे संत हैं । 

अतः ऐसा व्यक्ति जो की हमेशा अपने सवभाव को एक जैसा रखता है चाहे जैसी भी परिस्तिथि हो वो ही वास्तव में एक संत है वरना कपडे पहनकर अगर संत बनने लगे तो इस दुनिया में हर घर में आपको एक संत मिलेगा | 

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